Archive for September, 2011

मानवीय मूल्य एवं व्यवसायिक नीतिशास्त्र

प्रिय छात्रों,
मानवीय मूल्य एवं व्यवसायिक नीतिशास्त्र (Human Values and Professional Ethics) के इस ब्लॉग पर आपका स्वागत है |
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किसी भी देश के लिए उसकी शिक्षा – समस्या बड़ी जटिल वस्तु है; क्योंकि देश की शिक्षा के ऊपर ही उसका सारा भविष्य निर्भर है | देश के बालक और बालिकाएं किसी भी देश की अमूल्य निधि हैं | यदि देश की शिक्षा योजना सुन्दर, उपयोगी और देश के तथा मानवता के कल्याण के लिए बनाई गयी है तो देश के युवक और युवतियां चरित्र, त्याग, तपस्या से विभूषित हो कर अपना जीवन सफल बनावेंगी और मानवता के सुख और समृद्धि में वृद्धि करेंगी | इसके विपरीत देश की शिक्षा शैली दोष पूर्ण हुई  तो उस देश का अध:पतन होगा ही और वह देश मानव समाज के लिए अभिशाप होगा |
 हमारी शिक्षा – योजना का आदर्श बहुत ऊँचा है | हमने अपनी शिक्षा को धर्म का सहायक बनाया है | जो व्यवहारिक ज्ञान हमें सामर्थ्यवान बनाये उसी का नाम शिक्षा है | अर्थात जिस साधन से हम में सामर्थ्य हो, उसी साधन का नाम शिक्षा है; किन्तु आदर्श शिक्षा वह है, जिससे हमारी प्रकृति – प्रदत्त शारीरिक, मानसिक, बोद्धिक और नैतिक शक्तियां पूर्ण विकसित हो कर हमें सफल जीवन बिताने में समर्थ करती हैं | सफल जीवन के उपरान्त मोक्ष या मुक्ति दिलाने में भी सहायक होती हैं |
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